5 Famous Aartis to Sing During Navratri 2026: Full Lyrics for Garba Nights and Pandal Puja
The lamps are lit, the aarti thali is ready, and the gathering joins in a familiar prayer. Alongside the colour and excitement of garba, these moments of collective devotion give Navratri its special warmth.
If you are preparing for Navratri 2026, this collection brings together five traditional aartis for community worship. Jai Adhya Shakti, Jai Ambe Gauri and Durge Durghat Bhari are dedicated to the Goddess. Sukhkarta Dukhharta and Om Jai Jagdish Hare are familiar additions to broader puja sequences, depending on the mandal’s tradition.
There is no single five-aarti sequence followed by every garba pandal. Gujarati, Hindi-speaking and Maharashtrian communities have different favourites. The versions below retain the traditional languages, with the Gujarati aarti presented in Devanagari for readers who prefer that script.
Lyrics and repeated lines can vary slightly between temples, regions and recordings. Follow your local lead singer’s version when singing together.
1. Jai Adhya Shakti — जय आद्या शक्ति
Language: Gujarati, presented in Devanagari
Especially suitable for: Gujarati garba celebrations and Amba Mata aarti
“Jai Adhya Shakti” has a special place in Gujarati Navratri worship. Its verses praise the Goddess through different forms and lunar dates, while the familiar response—“ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे”—allows the whole gathering to participate.
Full traditional lyrics
जय आद्या शक्ति, माँ जय आद्या शक्ति।
अखंड ब्रह्मांड दीपाव्यां,
पडवे प्रगट्यां माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
द्वितीया बे स्वरूप, शिवशक्ति जाणूं,
माँ शिवशक्ति जाणूं।
ब्रह्मा गणपति गाये,
हर गाये हर माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
तृतीया त्रण स्वरूप, त्रिभुवनमां बेठां,
माँ त्रिभुवनमां बेठां।
त्रया थकी तरवेणी,
तुं तरवेणी माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
चोथे चतुरा महालक्ष्मी, सचराचर व्याप्यां,
माँ सचराचर व्याप्यां।
चार भुजा चौदिशा,
प्रगट्यां दक्षिणमां॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
पांचमे पंच ऋषि, पंचमी गुण पद्मा,
माँ पंचमी गुण पद्मा।
पंच तत्त्व त्यां सोहिये,
पंचे तत्त्वो माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
षष्ठी तुं नारायणी, महिषासुर मार्यो,
माँ महिषासुर मार्यो।
नरनारीना रूपे,
व्याप्यां सघळे माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
सप्तमी सप्त पाताळ, संध्या सावित्री,
माँ संध्या सावित्री।
गौ गंगा गायत्री,
गौरी गीता माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
अष्टमी अष्ट भुजा, आई आनंदा,
माँ आई आनंदा।
सुरनर मुनिवर जनम्यां,
देव दैत्यो माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
नवमी नवकुळ नाग, सेवे नवदुर्गा,
माँ सेवे नवदुर्गा।
नवरात्रीना पूजन, शिवरात्रीना अर्चन,
कीधां हर ब्रह्मा॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
दशमी दश अवतार, जय विजयादशमी,
माँ जय विजयादशमी।
रामे राम रमाड्यां,
रावण रोळ्यो माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
एकादशी अगियारस, कात्यायनीका माँ,
माँ कात्यायनीका माँ।
काम दुर्गा कालिका,
श्यामा ने रामा॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
बारसे बाळा रूप, बहुचरी अम्बा माँ,
माँ बहुचरी अम्बा माँ।
बटुक भैरव सोहिये, काळ भैरव सोहिये,
तारा छे तुजमां॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
तेरसे तुळजा रूप, तमे तारुणी माता,
माँ तमे तारुणी माता।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव,
गुण तारा गाता॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
चौदसे चौदा रूप, चंडी चामुंडा,
माँ चंडी चामुंडा।
भाव भक्ति कंई आपो, चतुराई कंई आपो,
सिंहवाहिनी माता॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
पूनमे कुंभ भर्यो, सांभळजो करुणा,
माँ सांभळजो करुणा।
वसिष्ठ देवे वखाण्यां, मार्कंड देवे वखाण्यां,
गाई शुभ कविता॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
संवत सोळ सत्तावन, सोळसे बावीस मां,
माँ सोळसे बावीस मां।
संवत सोळे प्रगट्यां,
रेवा ने तीरे, माँ गंगा ने तीरे॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
त्रंबावटी नगरी, रूपावटी नगरी,
माँ मंछावटी नगरी।
सोळ सहस्त्र त्यां सोहिये,
क्षमा करो गौरी, माँ दया करो गौरी॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
शिवशक्तिनी आरती, जे कोई गाशे,
माँ जे भावे गाशे।
भणे शिवानंद स्वामी,
सुख संपत्ति थाशे।
हर कैलासे जाशे, माँ अम्बा दुःख हरशे॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
एकमे एक स्वरूप, अंतर नव धरशो,
माँ अंतर नव धरशो।
भोळा भवानीने भजतां,
भवसागर तरशो॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
भाव ना जाणूं, भक्ति ना जाणूं,
नव जाणूं सेवा, माँ नव जाणूं सेवा।
वल्लभ भट्टने आपी, एवी अमने आपो,
चरणोनी सेवा॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
जय आद्या शक्ति, माँ जय आद्या शक्ति।
अखंड ब्रह्मांड दीपाव्यां,
पडवे प्रगट्यां माँ॥
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
This is a commonly circulated extended version; some mandals finish after the “शिवशक्तिनी आरती” verse.
2. Jai Ambe Gauri — जय अम्बे गौरी
Language: Hindi
Especially suitable for: Durga pandals, evening Navratri puja and Hindi-speaking gatherings
“Jai Ambe Gauri” is one of the best-known aartis dedicated to Maa Durga. Its verses describe the Goddess’s appearance, her protective forms and her victories over demons. It is widely sung during Navratri worship.
Full traditional lyrics
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख संपत्ति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
Some versions use “खड्ग खप्पर धारी” instead of “वरमुद्रा धारी” in the four-armed Goddess verse.
3. Durge Durghat Bhari — दुर्गे दुर्घट भारी
Language: Marathi
Especially suitable for: Maharashtrian Navratri mandals and Devi worship
This Marathi aarti addresses Durga as a compassionate protector and Mahishasuramardini. Its three verses make it a practical choice for community singing, with the congregation joining in the “जय देवी” refrain.
Full traditional lyrics
दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी।
अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी।
वारी वारी जन्ममरणाते वारी।
हारी पडलो आता संकट निवारी॥१॥
जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी।
सुरवर ईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥धृ॥
त्रिभुवनभुवनी पाहता तुज ऐसी नाही।
चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही।
साही विवाद करिता पडले प्रवाही।
ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही॥२॥
जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी।
सुरवर ईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥
प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा।
क्लेशांपासुनि सोडवि तोडी भवपाशा।
अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा।
नरहरी तल्लीन झाला पदपंकजलेशा॥३॥
जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी।
सुरवर ईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥
4. Sukhkarta Dukhharta — सुखकर्ता दुःखहर्ता
Language: Marathi
Especially suitable for: Opening a Maharashtrian community aarti sequence
“Sukhkarta Dukhharta” is dedicated to Lord Ganesha and is traditionally attributed to Samarth Ramdas. It commonly appears first in a Maharashtrian aarti sequence. For a Navratri gathering that follows this custom, it can precede the Devi aartis. It is a Ganesh aarti, rather than a Navratri-specific composition.
Full traditional lyrics
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥१॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥धृ॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥२॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥३॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
5. Om Jai Jagdish Hare — ॐ जय जगदीश हरे
Language: Hindi
Especially suitable for: A general concluding aarti, where included in the local puja tradition
“Om Jai Jagdish Hare” is dedicated to Lord Vishnu and is also sung at many other religious gatherings. Its familiar melody makes it accessible for a mixed community audience. It can accompany a Navratri puja, although it is not a Devi-specific aarti or a compulsory part of garba worship.
Full traditional lyrics
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबंधु दुःखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
This is the standard eight-stanza form. Some congregations also append the following offering verse:
तन-मन-धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
Choosing Aartis for Your Navratri 2026 Gathering
For a Gujarati garba celebration, make “Jai Adhya Shakti” the central selection. For a Hindi-speaking Durga pandal, “Jai Ambe Gauri” is a familiar choice. For a Maharashtrian mandal, “Durge Durghat Bhari” can follow the customary Ganesh aarti.
You do not need to sing all five at every gathering. Choose the sequence your community knows, share the same lyric sheet with everyone, and agree on the refrain before beginning. A comfortable pitch and steady pace will help children, elders and first-time participants sing together.
Whether the aarti takes place before garba, during an evening puja or in a quiet home shrine, leave enough time for the words to be sung with attention and devotion.
जय माता दी! जय अंबे माँ!